प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में गुरुवार को कांग्रेसी नेताओं
और उनकी योजनाओं का हवाला देकर उन्हीं पर ज़ोरदार हमला बोला। राष्ट्रपति के
अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने सबसे पहले सदन को
न चलने देने से विपक्ष का नुक़सान होने की चेतावनी दी।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक बयान के हवाले से मोदी ने कहा कि बहस के दौरान किसी को बख्शा नहीं जाता और उसकी उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए लेकिन सदन की गरिमा बनी रहनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने जोड़ दिया कि यह उपदेश नरेंद्र मोदी का नहीं राजीव गांधी का है।
सदन में विपक्ष के व्यवधान डालने का ठीकरा उन्होंने विपक्ष के सिर पर फोड़ा और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1957 में दिए एक वक्तव्य और फिर कुछ साल पहले सोमनाथ चटर्जी के बयान का हवाला दिया।
मोदी का कहना था कि विपक्ष में भी अच्छे सांसद हैं और उन्हें भी सदन में नहीं बोलने दिया जाता क्योंकि कुछ पार्टियों को इन्फ़ीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स है कि ऐसे तेजस्वी सांसद बोलेंगे तो उन्हें बोलने का मौक़ा कैसे मिलेगा।
सरकार के कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' के विरोध पर नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1968 के एक बयान के हवाले से कहा कि हमारे देश में कई दिक़्क़तें हैं, जो काफ़ी पुरानी हैं जैसे ग़रीबी, अंधविश्वास, पिछड़ापन। कुछ विकास और तरक्की के साथ आई हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या है तेजी से हो रहे बदलाव का विरोध और यह विरोध पढ़ा-लिखा तबका भी मुखर ढंग से करता है। मुझे लगता है कि एक मज़बूत और ऊंची दीवार ने हमें चारों ओर से घेरकर रखा है। मोदी का कहना था कि सदन में कुछ सांसद किसी भी नई योजना का विरोध करते हैं और उन्हें नई चीज़ें समझने में देर लगती है। और जब समझने में समय लगता है तो वो विरोध के नए तरीक़े ढूंढने लगते हैं।
मोदी ने नेशनल वॉटरवे बिल, व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन अमेंडमेंट बिल, जीएसटी बिल और कंज़्यूमर प्रोटेक्शन बिल के पारित न होने पर भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। Read more News Videos http://videos.jagran.com
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक बयान के हवाले से मोदी ने कहा कि बहस के दौरान किसी को बख्शा नहीं जाता और उसकी उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए लेकिन सदन की गरिमा बनी रहनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने जोड़ दिया कि यह उपदेश नरेंद्र मोदी का नहीं राजीव गांधी का है।
सदन में विपक्ष के व्यवधान डालने का ठीकरा उन्होंने विपक्ष के सिर पर फोड़ा और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1957 में दिए एक वक्तव्य और फिर कुछ साल पहले सोमनाथ चटर्जी के बयान का हवाला दिया।
मोदी का कहना था कि विपक्ष में भी अच्छे सांसद हैं और उन्हें भी सदन में नहीं बोलने दिया जाता क्योंकि कुछ पार्टियों को इन्फ़ीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स है कि ऐसे तेजस्वी सांसद बोलेंगे तो उन्हें बोलने का मौक़ा कैसे मिलेगा।
सरकार के कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' के विरोध पर नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1968 के एक बयान के हवाले से कहा कि हमारे देश में कई दिक़्क़तें हैं, जो काफ़ी पुरानी हैं जैसे ग़रीबी, अंधविश्वास, पिछड़ापन। कुछ विकास और तरक्की के साथ आई हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या है तेजी से हो रहे बदलाव का विरोध और यह विरोध पढ़ा-लिखा तबका भी मुखर ढंग से करता है। मुझे लगता है कि एक मज़बूत और ऊंची दीवार ने हमें चारों ओर से घेरकर रखा है। मोदी का कहना था कि सदन में कुछ सांसद किसी भी नई योजना का विरोध करते हैं और उन्हें नई चीज़ें समझने में देर लगती है। और जब समझने में समय लगता है तो वो विरोध के नए तरीक़े ढूंढने लगते हैं।
मोदी ने नेशनल वॉटरवे बिल, व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन अमेंडमेंट बिल, जीएसटी बिल और कंज़्यूमर प्रोटेक्शन बिल के पारित न होने पर भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। Read more News Videos http://videos.jagran.com
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